स्वास्थ्य
NUX-30
रोग
के लक्षण : किसी तरह का डकार, गैस
का न निकलना, अपच,
जी मिचलाना, बुखार, आंख में जलन, पैर से पसीना आना,
बाल झड़ना, आदि।
प्रयोग
: 5 गोली रात में सोते समय 3 से 4 दिन।
ARNICA-30
रोग
के लक्षण : हल्का कटा-छटा, ठेस लगकर छिला जाना, हल्का बाहरी चोट, खून रोकने के लिए, आदि।
प्रयोग
: 5-5 गोली सुबह-दोपहर-शाम एक सप्ताह तक
लें।
SULPHUR-30
रोग
के लक्षण : हल्का देह गर्म, पखाना नहीं होना, खाना का स्वाद पता
नहीं चलना, भूख नहीं लगना, बुखार, आदि।
प्रयोग
: 5 गोली सुबह में 2-3 दिनों तक लें।
ACONITE-3X
रोग
के लक्षण : ठंड या गर्मी से
सर्दी-खासी-सिर दर्द, हफनी, पंजरा मारना, सर्दी में आंख-नाक से पानी गिरना
और सरदर्द करना, आदि।
प्रयोग
: 5 गोली 3 दिनों तक चार बार
लें।
BRYANIA-200
रोग
के लक्षण : गर्मी से सर्दी-बुखार,
किसी तरह का पुराना बुखार,
पेट खराब होने के बाद बुखार,
सरदर्द, चलने-फिरने या हिलने-डुलने
पर दर्द, आदि।
प्रयोग
: 5-5 गोली सुबह-दोपहर-शाम 3 दिनों तक लें।
RHUSTOX-1M
रोग
के लक्षण : गैस, ज्वाइंट का दर्द, बैठने
में तकलीफ बढ़ जाना, बरसात में भींगने से बुखार, सर्दी
से पहले गला खसखसाना, आदि।
प्रयोग
: 5-5 गोली सुबह-दोपहर-शाम 2-3 दिनों तक लें।
IPECAC-200
रोग
के लक्षण : उल्टी, अपच, ठंड लगकर बुखार, डायरिया, खानपान में गड़बड़ी से पेट खराब,
आदि।
प्रयोग
: 5-5 गोली सुबह-शाम 2 दिनों तक लें।
PULSATILLA-200
रोग
के लक्षण : तेल-डालडा खाने से पेट खराब,
दूध पीने से उल्टी, महिलाओं
में श्वेत प्रदर, कमर दर्द, मासिक गड़बड़ी, बच्चों को रात में
पखाना ज्यादा होना, फैलेरिया या हाथी पांव,
आदि।
प्रयोग
: 5-5 गोली सुबह-दोपहर-शाम 4 दिनों तक लें।
CAULOPHYLLUM-2X
रोग
के लक्षण : प्रसव के लिए दर्द
बढ़ाने में यह काफी काम
करता है।
प्रयोग
: 5-5 गोली सुबह-दोपहर-शाम 4 से 6 दिनों तक लें।
LYCOPODIUM-200
रोग
के लक्षण : पुरुष नपुंसकता, जवानी में बुढ़ापा जैसा दिखना, कुबड़ा की तरह चलना,
पेट गड़गड़ाना, अपच पखाना, दांत कटकटाना, नाक खोदना, आदि।
प्रयोग
: 5-5 गोली सुबह-शाम 2 दिनों तक लें।
CANTHARIS-Q
रोग
के लक्षण : पेशाब में जलन, बूंद-बूंद पेशाब होना, जलने पर, आदि।
प्रयोग
: 5-5 गोली सुबह-दोपहर-शाम एक सप्ताह तक
तथा जलने पर हर 10 से
15 मिनट पर लहर निकलने
तक लें।
नोट
: दवा लेने से पहले किसी
चिकित्सक से परामर्श अवश्य
ले लें। होमियोपैथ में रुचि रखने वालों को डाॅ. एन.
सी. घोष की पुस्तक काॅम्पैरेटिव
मेटिरिया मेडिका पढ़नी चाहिए।

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